विद्यालय में नवाचार: जहाँ नन्हे मन रचते हैं
केन्द्रीय विद्यालय एनएचपीसी सिंगताम में शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अनुभवात्मक एवं कला-समेकित अधिगम पर ज़ोर दिया गया है। इसी के अनुरूप हमारे विद्यार्थी कक्षा में सीखी बातों को रचनात्मक परियोजनाओं का रूप देते हैं। यहाँ प्रस्तुत हाल की कृतियाँ उनकी कल्पनाशीलता, कौशल और आसपास की दुनिया की समझ को दर्शाती हैं।
पोस्टर: भारत की प्रगति-यात्रा
एक विद्यार्थी ने स्वतंत्रता के बाद भारत के विकास पर एक विस्तृत पोस्टर बनाया। इसके केंद्र में स्नेहपूर्ण हाथों में थामा गया भारत का मानचित्र है। उसके चारों ओर रेलवे, डाक सेवा, विद्युत, डिजिटल इंडिया, आर्थिक विकास, हाई-स्पीड रेल, आवास, लैंगिक समानता, अंतरिक्ष अभियान और महिला सशक्तिकरण पर आधारित चित्र बने हैं। इस पोस्टर में अच्छा शोध, सुविचारित संयोजन और राष्ट्र की उपलब्धियों पर गर्व झलकता है। यह सामाजिक विज्ञान और दृश्य कला के सुंदर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।
👕 फ़ैब्रिक पेंटिंग: भगवान महावीर
कला को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए एक विद्यार्थी ने सादी सफ़ेद टी-शर्ट पर ध्यानमग्न भगवान महावीर का चित्र अपने हाथों से बनाया। प्रभामंडल, शांत मुखमुद्रा और आकर्षक अक्षरांकन उसके धैर्य और सधे हुए हाथ का परिचय देते हैं। इस गतिविधि से विद्यार्थियों ने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और अहिंसा तथा करुणा जैसे मूल्यों को करीब से जाना। साथ ही उन्होंने रोज़मर्रा की वस्तुओं को कलाकृति में बदलने का व्यावहारिक हुनर भी सीखा।
🏘️ 3D मॉडल: परिवार और समुदाय
एक नन्ही विद्यार्थी ने एक रंग-बिरंगे मोहल्ले का 3D मॉडल बनाया। इसमें विद्यालय, अस्पताल, बाज़ार, पार्क और सड़कें हैं। साथ ही परिवार के सदस्यों और डॉक्टर, पुलिसकर्मी, माली जैसे सामुदायिक सहायकों की आकृतियाँ भी बनाई गई हैं। इस व्यावहारिक परियोजना से विद्यार्थी ने जाना कि एक समुदाय कैसे चलता है और उसमें हर व्यक्ति का क्या योगदान होता है। इस तरह पर्यावरण अध्ययन (EVS) की अवधारणा सजीव हो उठी।
इसका महत्व
ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को:
- रचनात्मक रूप से सोचने और अपने विचारों को मौलिक ढंग से व्यक्त करने में मदद करती हैं
- सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन, कला और मूल्य शिक्षा जैसे विषयों को आपस में जोड़ने का अवसर देती हैं
- योजना बनाने, डिज़ाइन करने और शिल्प जैसे व्यावहारिक कौशल विकसित करती हैं
- अपने कार्य को प्रस्तुत करके आत्मविश्वास बढ़ाती हैं
विद्यालय हर बच्चे को खोजने, प्रयोग करने और नवाचार करने का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। आज की छोटी-छोटी रचनाएँ ही कल के बड़े विचारों की नींव बनती हैं।